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Monday, May 5, 2025

उसका ख्याल

 'उसका ख्याल..!

सुनहरे चादर में लिपटी...!

उलझा था मेरे काले केशों में...!

उसका ख्याल 



.

गोधूली बेला..!..और...!!

जल रहा था..!

आकाश में सूरज...!

.

सांझ और रात के बीच..!

हो रहा था एक मौन संवाद..!

.

मैं शृंगार करूँ-

कि-

न करूँ...?

ओ मेरे भ्रमित मन..!

.

क्यों...?

हरसिंगार की उदास खूशबू...?

मेरी आत्मा को कचोटती है...?

बारम्बार...!!

कुन्ती।

Thursday, May 1, 2025

पिघलता क्षण

 पिघलता क्षण

सच मानिये !

कभी कभी मुहूर्त आपके मुताबिक  नहीं होता

चाहकर भी कोई  काम नहीं होता

अगर करो भी तो कोई  न कोई बाधा आ ही जाता

तितली फूल पर बैठती है तो फूल झड़ जाता है

नदी किनारे पक्षी भूखा ही रह जाता है

और नाव विपरीत दिशा में बही  चली जाती है।




Monday, April 28, 2025

every morning

Every morning/ हर सुबह 


https://pin.it/6oFchsHH0


https://pin.it/39goEKjzr





'Every morning 🌄 हर सुबह....!
हवा में एक खुशबू आती है...!
ताज़े फूलों की...!
जो मेरे रंघ्रों से गुज़र कर...!
मेरे वजूद पर छा जाती है...‍!.

जब मैं हँसती हूँ...
मुस्काती हूँ सूर्यकिरणों के संग
तब-
अपनी राह भूल कर
तितलियों भी उड़्ती है...!
मेरे आसपास....!!





भँवरे ठिठक कर रूक जाते हैं...!
गुनगुनाते हैं....
रसीले गान...शहद में डूबे...!
लेकिन-
उसके हाव-भाव से
आती है सौदे की बू...!!

होती है शाम...!
लेकिन हवा में वह खूशबू नहीं होती...!
क्योंकि-
भँवरे और कुछ जंगली फूलों के-
होते हैं हवा में षड्यंत्र...!!


Every morning हर सुबह 
एक लम्बा वक्त तय कर....!
मुझे होती है प्रतीक्षा....!
एक नयी सुबह की...!!.

Every morning हर सुबह
बदल जाती है
मेरी प्रतीक्षा कभी-
एक अंतहीन पीड़ा में-
निहारती है मेरी आँखें...
एक क्षितिज, झिलमिल 

Every morning हर सुबह
मेरे कदम चल पड़ते हैं...!
एक अंजान सफ़र की ओर...!
उस खूशबू की खोज में...
निरंतर
जो हर पल दूर हटती जाती है मुझसे-
__कुंती.

Monday, July 29, 2024

WORLD LION DAY-अंतर्राष्ट्रिय बाघ दिवस

 World Lion Day - अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस क्यों मनाया जाता है


 World Lion Day-अंतर्राष्ट्रिय बाघ दिवस दुनिया भर में  हर साल10 अगस्त को शेरों और उनके आवासों के संरक्षण के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है।

• 2013 में Big Cat Rescue ( बिग कैट रेस्क्यू )द्वारा (स्थापित किया गया था, जो शेरों को समर्पित दुनिया का सबसे बड़ा मान्यता प्राप्त Santuary (अभयारण्य ) है।
• 2013 में Derk (डेरेक )और BeverleyJoubert(बीवरले जौबर्ट )ने जंगल में शेरों के सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के इरादे से Big Cat Rescue की स्थापना की थी।



• इससे पहले, Joubert (जौबर्ट )ने
National Geographic नेशनल जियोग्राफ़िक के साथ मिलकर Big Cat Initiative( बिग कैट इनिशिएटिव )भी बनाया था।

• बाघ को बचाने के लिए क्या उपाय किया जाता है,आइये जानें:-

विश्व बाघ दिवस पर, शेरों और उनके अद्वितीय गुणों को कला, फोटोग्राफी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से मनाया जाता है।

• कई संगठन, वन्यजीव संरक्षण समूह, चिड़ियाघर और व्यक्ति गतिविधियों और अभियानों में भाग लेते हैं ।
•बाघ दिवस का उपयोग शेर संरक्षण परियोजनाओं, अवैध शिकार विरोधी प्रयासों के लिए धन जुटाने के लिए करते हैं।


बाघ इतने महत्वपूर्ण क्यों हैं?

•बाघ अपने पर्यावरण में शीर्ष शिकारी होते हैं, चाहे वह घास के मैदान हों, रेगिस्तान या खुले जंगल। 
• बाघ, विशेष रूप से ज़ेबरा और वाइल्डबीस्ट जैसे शाकाहारी जानवरों के बीच संख्या का स्वस्थ संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं - जो बदले में घास के मैदानों और जंगलों की स्थिति को प्रभावित करता है।


• विश्व वाघ दिवस इस पशु प्रजाति और इसके सामने आने वाले खतरों के बारे में जागरूकता बढ़ाता है। 

यहाँ कुछ कारण दिए गए हैं कि यह दिन इतना महत्वपूर्ण क्यों है:-

• सांस्कृतिक महत्व - शेर हमारे देश और अन्य देशों के इतिहास और संस्कृति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 


• वास्तव में, इस अविश्वसनीय प्रजाति को भारतीय राष्ट्रीय प्रतीक चिन्ह के चारों तरफ दर्शाया गया है।

• विलुप्त होने का जोखिम - शेर पहले से ही एक नाजुक प्रजाति है, और हमें उन्हें विलुप्त होने से बचाने के लिए सावधानी बरतनी चाहिए।

• दुर्व्यवहार और व्यापार - दुर्भाग्य से, शेरों का व्यापार और दुर्व्यवहार दुनिया भर में फैला है। 

•शेर दिवस इस खतरे के बारे में जागरूकता बढ़ाता है और अंतर्राष्ट्रीय नेताओं से उचित कार्रवाई करने का अनुरोध करता है।



                               शेर v/sबाघ के बारे में कुछ  विशेष जानकारी:-

• शेर और बाघ सबसे क्रूर जानवरों में से हैं ।

•  दोनों के बीच महत्वपूर्ण अंतर हैं। 

• बाघ  और शेर पाँच बड़ी बिल्लियों में से हैं , जैसे:-

(जागुआर, तेंदुआ, हिम तेंदुआ)


• शेर  सवाना और घास के मैदानों में  ज्यादातर देखे जाते हैं।

 • शेर बहुत ही विशिष्ट होता है और उसे उसके अयाल (झबरीले बाल )से आसानी से पहचाना जा सकता है। 

• शेर, अर्थात नर शेर का चेहरा, मानव संस्कृति में सबसे ज्यादा पहचाने जाने वाले पशु प्रतीकों में से एक है। 

• शेर साहित्य, मूर्तियों, चित्रों, राष्ट्रीय झंडों और फिल्मों में बड़े पैमाने पर दर्शाया जाता है।

ज्ञात हो:-

बाघ - एशिया की मुख्य भूमि का मूल निवासी है।

 बाघ दुनिया की सबसे बड़ी बिल्ली की प्रजाति है। 

• बंगाल टाइगर बाघ की सबसे आम उप-प्रजाति है, जो पूरी बाघ आबादी का लगभग 80% हिस्सा है।

 • बाघ भारत, बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार और नेपाल में पाया जाता है। 

•यह भारत का राष्ट्रीय पशु है। 

●(एक लुप्तप्राय प्रजाति ,बाघ जो अब  दुनिया के अधिकांश  ZOO में सुरक्षित रहते हैं।

बाघ बनाम शेर जीवन काल

शेर : जंगल में शेर लगभग 12-18 वर्ष तक जीवित रहते हैं, जबकि Zoo के संरक्षण में वे 24 वर्ष से अधिक जीवित रह सकते हैं।


Friday, July 12, 2024

RAIN बरसात

                                 RAIN  🌧 बरसात



RAIN - बरसात 

रात भर ___

हाँ रात भर____

मेघों ने बहुत प्रलोभन दिया।


छत से टपर टपर की आवाज़ आती रही

बिजली गुल थी

मैंने खिड़की के पर्दे हटा रखे थे

बहुत गरमी के बाद ये बारीश नसीब हुई थी

आँखें नींद से बोझिल थी

और सपनों के अम्बार लगे थे

लेकिन _____मुझे सोना था

सपने नहीं देखने थे

ये मेघों का प्रलोभन_____!!


खेत __तालाबों में परिणत थे

नाव __न पतवार को खेना था

माझी भी कहीं दुबका पड़ा था।

मैंने कब पहली बार बारिश में____

तुम्हारे साथ

हाथों में हाथ लिये

उस पगडंडी पर चली थी

जो पहाड़ों से होकर मेघों के देश जाता था।

हाँ, तब मेघों ने हमें निमंत्रण दिया था।

कितने भीगे थे हम

तन से कहीं ज्यादा भीगा था मन।

 RAIN🌧 -बरसात 





अब तो बात पुरानी हो गयी है

पर याद कितनी ताज़ी है

आज फिर मेघों ने निमंत्रण दिया है

लेकिन____ जब मैंने लिया नहीं निमंत्रण

तब देखो उसका प्रलोभन।

RAIN-बरसात


मेरे आँगन में हीरक मुकुट बरसा रहा है

मैं ने  बिजली की स्मित रेखा में दूर तक देखा।

लेकिन____बोझिल आँखें 

मैं सो गयी थी।

सुबह  हीरों के कण बेल बूटों पर बिखरे थे।

RAIN-बरसात


मैंने आकाश की ओर देखा

बादल झुके थे

बरसने को उद्यत

 अहा !मेघ तुम्हारा प्रलोभन !

मैंने मुस्का दिया।"



Sunday, June 30, 2024

Monsoon song

 Monsoon Song/ मॉनसून गीत


मॉनसून गीत गाता है।


                                     नदी गाती है


इठलाती है

सब की प्यास  बुझाती है।


सागर____

एक आदिम आकर्षण के वशीभूत

लहराता है

गर्जन करता है

पवन से कहता है ___

"नदी मेरी है।"

तब मॉनसून गीत गाता है।


सूरज और पवन

दोनों का षडयंत्र चलता है।



नदी वाष्प बन जाती है।

तब बादल उसे मैके से धरती पर लाता है।

सावन की झड़ी लग जाती है।

मॉनसून गीत गाता है


#मॉनसून


Saturday, June 22, 2024

RAIN FOREST DAY

                      RAIN FOREST DAY वर्षावन दिवस 


विश्व वर्षावन मनाने का उद्देश्य है लोगों के मन में वन के प्रति लगाव, महत्व और जागरूकता बढ़ाना है
• सभी को वर्षावनों की रक्षा के लिए लड़ाई में शामिल होने के लिए कुछ समय निकालने के लिए प्रोत्साहित करना है।
लोग वनों को तरह तरह से पारिभाषित करते हैं।जैसे___
• जंगल एक बड़ा हरा-भरा जंगली क्षेत्र होता है जो प्राकृतिक रूप से बढ़ता है।




• जंगल आमतौर पर पेड़ों, घनी वनस्पतियों और जानवरों से भरा एक बड़ा क्षेत्र होता है।
• वे हमारे पारिस्थितिकी तंत्र का एक अनिवार्य हिस्सा हैं जिन्हें संरक्षित और संरक्षित किया जाना चाहिए।
• पृथ्वी पर वन क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा कवर करते हैं।
• वे एक आवश्यक प्राकृतिक संपत्ति हैं और उनका बहुत महत्व है।
• पेड़ कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करते हैं और हमें सांस लेने के लिए ऑक्सीजन उत्पन्न करते हैं।



• चूँकि जंगल ऑक्सीजन का उत्पादन करते हैं, इसलिए उन्हें पृथ्वी के हरे फेफड़े के रूप में भी जाना जाता है।


• जंगल अनमोल संसाधन हैं जिन्हें संरक्षण की आवश्यकता है।
वे पौधे और पशु साम्राज्य की असंख्य प्रजातियों का घर है।


मनुष्यों को जंगल के संसाधनों का उपयोग करना सीखना चाहिए और प्रकृति को बचाने में मदद करने के लिए उन्हें संरक्षित करना चाहिए।


वर्षावन दिवस हमें  क्यों मनाना चाहिए?

• वर्षावनों में मूल्यवान पौधों, पेड़ों और हरियाली को बचाने तथा जनजीवन में जागरूकता लाने के लिए वर्षावन दिवस एक अनुस्मारक के रूप में कार्य करता है।
• वर्षावन दिवस एक ऐसा दिन है जब आपको वर्षावनों की दुनिया और पृथ्वी पर जीवन का समर्थन करने में उनकी भूमिका की खोज करने के लिए आमंत्रित किया जाता है।
वर्षावन दिवस _वर्षावनों के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने और उनकी सुरक्षा और संरक्षण के प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए समर्पित दिन है।

 

विश्व वर्षावन दिवस 2024 का विषय है __
• 'हमारे वर्षावनों की रक्षा में विश्व को सशक्त बनाना।'


इस वर्ष की थीम : 2024 है (The Year Of Action)अर्थात् कार्यवाही का वर्ष।
• कार्रवाई का वर्ष। यह सभी क्षेत्रों, सभी देशों, सभी मनुष्यों के लिए एक वैश्विक आह्वान है।
• आप ग्रह के लिए कैसे सामने आएंगे?
• वनों की कटाई को समाप्त करने और जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए नए समाधानों की आवश्यकता नहीं है - इसके लिए तत्काल और निरंतर कार्रवाई की आवश्यकता है


वन को वर्षा वन क्यों कहा जाता है?

•  "वर्षा" वन इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहां प्रति वर्ष बहुत अधिक वर्षा होती है।
• वर्षा वनों में वार्षिक वर्षा कम से कम 100 इंच (254 सेंटीमीटर) और अक्सर इससे भी अधिक होती है।
वन दिवस क्यों मनाया जाता है?

पृष्ठभूमि। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2012 में 21 मार्च को विश्व वर्षावन दिवस घोषित किया था।
विषय __'हमारे वर्षावनों की रक्षा करना,विश्व को सशक्त बनाना।'
जिससे सभी प्रकार के वनों के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाई जा सके।



Famous quotations:-
1. We inter-breathe with the rain forest, we drink from the Ocean.They are part of our own body.~Thich Nhat Hanh.
2. Enter Silence.Let NATURE heal you of everything that hurts.~Federick AR.
3. We are aware only of the empty space in the FOREST, which only Yesterday was filled with trees.~Anna Freud.

4.



Monday, June 17, 2024

DESERTIFICATION

 जानें मरुस्थलीकरण (Desertification)का मतलब



1. मरुस्थलीकरण प्राकृतिक प्रक्रियाओं और मानवीय गतिविधियों के संयोजन के कारण उपजाऊ भूमि के शुष्क रेगिस्तान में क्रमिक भूमि क्षरण का एक प्रक्रिया है
2. मरुस्थलीकरण वह क्षरण प्रक्रिया है जिसके द्वारा उपजाऊ भूमि अपने वनस्पतियों और जीवों को खोकर रेगिस्तान में बदल जाती है ।
3. यह सूखे, वनों की कटाई, जलवायु परिवर्तन, मानवीय गतिविधियों या अनुचित कृषि के कारण हो सकता है।
4. मरुस्थलीकरण भूमि के क्षरण की एक प्रक्रिया है जो
शुष्क क्षेत्रों का  प्रसार विभिन्न कारकों के कारण होता है_ जैसे मानव गतिविधि के परिणामस्वरूप मिट्टी का अत्यधिक क्षरण होना।

5. मरुस्थलीकरण(Desertification) के सर्वाधिक कारणों में शामिल हैं निम्न बातें_

• अधिक जानवरों को चराना
• अत्यधिक खेती बाड़ी
• आग में वृद्धि
• पानी को घेरे में बन्द करना
• वनों की कटाई
• भूजल का अत्यधिक इस्तेमाल करना
•  मिट्टी में अधिक लवणता का बढ़ जाना
और वैश्विक जलवायु परिवर्तन 
राजस्थान में मरुस्थलीकरण (Desertification)

• धरती के भूमि क्षेत्र का लगभग एक-तिहाई भाग इसी प्रकार की भूमि से बना है।



मरुस्थलीकरण (Desertification)का दूसरा  वर्णन जानें।

मरुस्थलीकरण से तात्पर्य  है_
• जलवायु परिवर्तन
•  मानवीय गतिविधियों के कारण शुष्क भूमि पारिस्थितिकी तंत्र के लगातार क्षरण 
• यह सभी महाद्वीपों (अंटार्कटिका को छोड़कर) पर होता है ।
• शुष्क भूमि में रहने वाले गरीबों का एक बड़ा हिस्सा भी शामिल है।


मरुस्थलीकरण के चार कारक :-

मरुस्थलीकरण उन कारकों के संयोजन के कारण होता है जो समय के साथ बदलते हैं और स्थान के अनुसार बदलते रहते हैं।
1.  अप्रत्यक्ष कारक जैसे जनसंख्या दबाव
2.  सामाजिक आर्थिक
3.  नीतिगत कारक
4. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के साथ-साथ प्रत्यक्ष कारक जैसे भूमि उपयोग पैटर्न और प्रथाएं।
5. जलवायु-संबंधित प्रक्रियाएं 

हर साल एक थीम को दृष्टि में रख कर काम किया जाता है
2024 का थीम है___"भूमि के लिए एकजुट "
Theme__"United for Land,
                  Our Legacy, Our Future.
बॉन, जर्मनी (Bonn,Germany)17 जून 2024 -


• स्थायी भूमि प्रबंधन के समर्थन में सभी पीढ़ियों को संगठित करना ।
• मरुस्थलीकरण और सूखा दिवस 2024 का केंद्रबिंदु है।
       जिसे 17 जून को मनाया जाता है।
• भूमि क्षरण और सूखे से निपटने के वैश्विक प्रयास में एक महत्वपूर्ण क्षण है।
बॉन(Bonn) में संघीय आर्थिक सहयोग और विकास मंत्रालय (BMZ) के माध्यम से जर्मनी (Germany) के संघीय गणराज्य(Federal Republic  of Germany)द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम:-



"भूमि के लिए एकजुट,हमारी विरासत,हमारा भविष्य" (United for Land: Our Legacy: Our Future)


थीम के तहत दुनिया भर के परिवर्तनकर्ताओं को एक साथ लाया गया।

मरुस्थलीकरण क्या है Drishti IAS?

मरुस्थलीकरण एक ऐसी भौगोलिक घटना है, जिसमें उपजाऊ क्षेत्रों में भी मरुस्थल जैसी विशिष्टताएँमरुस्थलीकरण से कैसे बचा जा सकता है

• मरुस्थलीकरण की रोकथाम के लिए वनस्पति आवरण का संरक्षण एक प्रमुख साधन हो सकता है
• मिट्टी को हवा और पानी के कटाव से बचाने के लिए वनस्पति आवरण बनाए रखना मरुस्थलीकरण के खिलाफ एक प्रमुख निवारक उपाय है।




 
रेगिस्तान कैसे बचा सकते हैं?

रेगिस्तान को बचाने के लिए मुख्य तरीके इस प्रकार है__

• वृक्षारोपण और बीजारोपण:
• रेगिस्तान के अनुकूल वनस्पतियों का सावधानीपूर्वक और रणनीतिक रोपण
• इन पारिस्थितिकी तंत्रों के प्राकृतिक संतुलन को बहाल करने में मदद कर सकता है।
• जल प्रबंधन - शुष्क रेगिस्तानी परिस्थितियों में जल संसाधनों का कुशल उपयोग और संरक्षण महत्वपूर्ण है।
मिट्टी के गुणों में हेरफेर, और आवरण प्रदान कर
रेगिस्तान को  बचाना चाहिए?
• रेगिस्तानी पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण आवश्यक है क्योंकि वे पौधों, जानवरों और मनुष्यों को समर्थन देने वाली जैव विविधता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं ।
• इस सम्मेलन की एक हस्ताक्षरकर्ता और प्रतिबद्ध समर्थक है, मरुस्थलीकरण और सूखा दिवस 2024 (जिसे मरुस्थलीकरण और सूखा रोकथाम दिवस 2024 के रूप में भी जाना जाता है) के वैश्विक पालन की मेजबानी करेगी।
• आर्थिक सहयोग और विकास मंत्रालय (BMZ) और बॉन शहर के सहयोग से, जो 1999 से UNCCD सचिवालय का घर है, सार्वजनिक कार्यक्रमों की एक श्रृंखला आयोजित की जाएगी।

• मरुस्थलीकरण और सूखा दिवस 2024 के कार्यक्रमों में__
• एक फोटो प्रदर्शनी
• शैक्षिक कार्यक्रम और संगीत प्रदर्शन शामिल होंगे।
•  इस वर्ष की थीम के वैश्विक प्रसार को सुनिश्चित करने के लिए पहले से ही एक सोशल मीडिया अभियान शुरू किया गया। 
• मरुस्थलीकरण और सूखा दिवस को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा " मरुस्थलीकरण और सूखे से निपटने के लिए विश्व दिवस" ​​के रूप में घोषित किया गया था ।

Sunday, May 26, 2024

PLANETARY ALIGNMENT-June 2024

 Planetary Alignment अर्थात्  ग्रहों का संरेखण



• संरेखण किसे कहते हैं ?


एक ही रेखा में किसी भी वस्तु  को एक सीधी रेखा में होना या आना। इस प्रक्रिया को संरेखण कहते हैं। अगर गणितीय भाषा में समझें तो किसी भी System चार संरेखण होते हैं।
Left, right ,proper और center.
__जैसे किसी भी गाड़ी का  servicing करने से अंत में उसके पहिये की दूरी का संरेखण (alignments) करते हैं जिससे पहिये का संरेखण ठीक हो और सही दिशा में चले।

__अब जानें ग्रहों का संरेखण क्यों होता है ?
अंतरिक्ष में जो ग्रह (Planet) है सब अलग-अगल गति और दूरी से सूरज की परिक्रमण  करते हैं।
__अंतरिक्ष में 1000 एक अजीब संयोग बनने जा रहा है।
__3 June 2024 को लोग छः ग्रहों को एक Line में देख सकेंगे।


संरेखित ग्रह का नाम इस प्रकार हैं-
1.बुध (Mercury), 2.मंगल (Mars),
3.बृहस्पति (Jupiter), 4.शनि ( Saturn)
5. यूरेनस (Uranus) 6.नेप्च्यून (Neptune)

चित्र: vajiramandravi.com के सौजन्य से

*ज्ञात हो कि ऊँच शक्ति वाली दूरबीन हे ही देखा जा सकता है। वास्तव में ग्रहों का संरेखण अति दूर से एक झिलमिल परिदृश्य है।
अंतरिक्ष में तरह-तरह की धटनाएं धटित होती रहती है।
हम पुराण कथाओं में पढ़ते आए हैं कि फलां ग्रह में ऐसा हुआ, फलां ग्रह मेंज वैसा हुआ। लेकिन अंतरिक्ष का समुचित ज्ञान न होने के कारण हमारे लिए पुराण की कथाएं
महज एक मनोरंन के साधन बनके रह गए हैं।
आज डिज़िटल की क्रांतिकारी युग में हमें Internet के जरिए घर बैठे सब प्रकार का ज्ञान प्राप्त हो जाता है।
मैं नेट ही  https://www.providencejournal.com/digital magazine में पढ़ा था कि 3rd June 2024 को अंतरिक्ष में ग्रहों का संरेखण (Planetary Alignment) होने वाला है।

चूंकि मेरा प्रिय Subject है मैं ने पूरा लेख पढ़ा। लेख बहुत ही दिलचस्प है।
ग्रह संरेखण से संबंधित शिव पुराण में कथा हो-
भगवान शिव का ज्येष्ठ पुत्र  स्वामी कार्तिकेय, तारकासुर नामक राक्षस को वध कर दिया था।
तारकासुर के तीनों पुत्रों  ने प्रण किया कि वे अपने पिता का बदला जरूर लेंगे।
वे एक हज़ार वर्ष तक ब्रम्हा की तपस्या की। ब्रम्हा प्रसन्न होकर उनसे वर मांगने को कहा।
वे अमर होने का वरदान मांगे।ब्रम्हा ने कहा-
"ये प्रकृति के खिलाफ है। तुम लोग कोई और वरदान मांगो।"
तब तीनों भाइयों ने मांगा-
"हमारे लिए अलग-अगल  ग्रहों में एक एक महल बनवाईये। हम उसी में वास करेंगे, लेकिन ग्रह लगातार चलायमान होनी चाहिए। जब एक हज़ार साल बाद हमारे ग्रह का संरेखण होगा तब अगर किसी देवता में सामर्थ्य हो तो वे एक ही बाण से तीनों लोकों को छेद सकते हैं।"
ब्ररहम्हा ने अस्तु कहा और अंतर्धान हो गये।
तीनों भाई बहुत खुश हुए क्यों कि उनकी समझ में यह काम बहुत बड़ा ( task) था और असम्भव था।
ब्रम्हा ने मयदानव को आदेश दिया कि तुम तीनों भाइयों के लिए  अलग-अगल ग्रह में सोने,चांदी और लोहे के महल बनवा दो
मयदानव ने सबसे बड़े (तारकक्ष) के लिए सोने का,
मझले(कमलाक्ष) का चांदी का और सबसे छोटे
(बिद्युन्माली) का लोहे का महल बना दिया।
तीन भाई अपने अपने लोक में रहकर उत्पात मचाने लगे। देवताओं को तरह-तरह के कष्ट पहुँचाते । तीनों लोकों को अपने अधिकार में कर लिये।
देवता हैरार परेशान शिव जी के शरण में गये और अपनी विवशता सुनाए।

शिव जी को ग्रहों के संरेखण का ज्ञान। उन्होंने देवताओं को आश्वासन दिये और निश्चित समय का इंतजार करने लगे।
शिव ने एक दिव्य  रथ का निर्माण किया।रथ की हर एक वस्तु देवताओं से बनी।
सूर्य और चंद्र रथ के पहिये बने।




रथ के घोड़े क्रम से इंद्रदेव, वरुण देव,यमराज, कुबेर बने।
हिमालय धनुष और शेषनाग प्रत्यंचा बने।
शिव स्वयं बाण बने। तीनों भाइयों के साथ  घोर युद्ध हुआ।
आखिर एक तीन तीनों भाइयों का ग्रह एक सीध में रेख में गा गये।
शिव जी ने एक ही बाण से नीनों को छेद दिया।

कभी कभी कहानी-कथा हकीकत की दुनीया से कैसे मेल खाते हैं।
अधिक जानकारी के लिए hindi.webdunia.com  में जाएं।













__

Tuesday, May 21, 2024

Acorn Fruit - the amazing story of its long journey

Acorn Fruit - the amazing story of its long journey.


 Acorn Fruit
- बलूत का फल

बलूत फल की कहानी बड़ा ही दिलचस्प है।

• बलूत का फल ओक के पेड़ पर लगते हैं। रूप में अंडाकार, कच्चे होने पर हरे रंग और पक जाने पर पीले हो जाते हैं।
• इसके वृक्ष को शाहबलूत बलूत  और  बांज से भी जाने जाते हैं। इंग्लिश में इस पेड़ का नाम ओक (Oak) है।
• (Oak) बांज ((Fagaceae)बिरादरी के (Quercus)जाति का वृक्ष है।
• विश्व भर में ओक के पेड़ की 500 से अधिक प्रजातियाँ पाये जाते हैं।
• सफेद ओक के पेड़ पर जल्दी बलूत के फल विकसित होते हैं जबकि लाल ओक के फल धीमे गति से चलते हैं।
(Oak) बलूत का विशाल पेड़ जंगलों में एक राजसी ठाठ प्रदान तो करते ही हैं साथ ही ये अनेक वन्य जीवों का आश्रयस्थल भी हैं।
• (Oak) को दो समुहों में बांटा गया है। सफेद ओक और लाल (काला) ओक।

(Black Oak Tree.Photo credit:Pexel/Marek Piwnicki)

सफेद ओक में चिकनी और बाल रहित पत्तियों होती हैं।इसके फल में मीठे स्वाद वाले बीज होते हैं जो एक मौसम में पक जाते हैं। ये पतझड़ के मौसम में गिरते हैं।जमीन में गिरते ही अंकुरित होना शुरू कर देते हैं।जबकि लाल (काला)ओक के पत्ते नुकीले लोब वाले होते हैं। इसके फल पकने में दो वर्ष लगते हैं और कड़वे होते हैं। इसके फल को अंकुरित करने का अलग प्रोसेसिंग होते हैं।
• बलूत का पेड़  20 वर्ष के बाद ही फल देने में सक्षम होता है। ज्ञात हो कि एक स्वस्थ पेड़ 10.000 तक फल दे सकता है।
• एक वयस्क बलूत के पेड़ पर दो प्रकार के फूल खिलते हैं। नर (Catkins) और मदा (Pistillate)। अन्य बसंत के फूलों से ये फूल अपनी अलग पहचान रखते हैं। खासकर मादा फूल। ज्ञात हो कि बलूत को एकलिंगी प्रजाति की श्रेणी में रखा जाता है क्योंकि वे नर और मादा दोनों तरह के फूल पैदा करते हैं। ओक के पेड़ों पर बसंत के अंतिम चरण में फूल खिलते हैं।



बलूत फल खाना चाहिए या नहीं?
बलूत का फल पोषक तत्वों से भरपूर होता है।
हालांकि बलूत का फल जंगली सुअरों, हिरणों,गिलहरियों और पक्षियों का प्रिय भोजन है। लेकिन इंसान को इसे बिन प्रोसेस किये कभी नहीं खाना चाहिए। क्योंकि इसमें एक टैनिन एसिड पाए जाते हैं जो शरीर के अच्छे तत्व को अवशोषित करने का गुण रखते हैं।


बलूत के फल का सफ़र बड़ा दिलचस्प है।

प्राचीनकाल से जब इंसान खानाबदोश थे तबसे बलूत के फल का सेवन होते रहे थे।
उसके बाद द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान गेहूं और चावल के अभाव में ये फल मुख्य जीविका का साधन बन गया था।

प्राचीन ग्रीस में तो इस फल को चुनने की सख्त मना थी। इसे (योद्धाओं का भोजन) कहा जाता था।
पुर्तगाल, स्पेन के जंगलों में ओक का जंगल बहुतायत में पाए जाते हैं। वहां (black Iberian Pig) इसे बड़े चाव से खाते हैं।जिससे उसके मांस में गुणवत्ता पायी गई। इससे पीग का मांस चिकनाई से भरपूर, स्वादिष्ट और सुगंधित पायी गयी है।
जैसे-जैसे मानव सभ्यता समृध्द होती गयी, बलूत के फल के भोजन को निम्न श्रेणी में रखा जाने लगा।। कालांतर में यह 'एक भूला हुआ भोजन' बन के रह गया।
अब कालचक्र कहें या विडंबना बलूत के फल को फिर से प्रकाश में लाया जाने लगा। जो फल गिलहरी, हिरणों और सुअरों का भोजन कह त्याग दिया गया था, अब इस फल को प्रोसेस कर ग्लूटेन-मुक्त आटा बनाए जाते हैं और उससे तरह तरह के केक बनाए जाते हैं।
आशा है आने वाले कल में बलूत के फल का सफ़र विविध आयामों में होगा।(देर आए दुरुस्त आए)।
It's never too late to get good at something.
_Guy Fieri

प्रेरणास्रोत:
"Acorn | Definition & Facts"Encyclopedia Britannica

Thursday, May 16, 2024

Aurora: Mysterious Wonder of Nature

 Aurora: Mysterious Wonder of Nature.

अर्थात्:  एक रहस्यमय प्राकृतिक आश्चर्य। 

Photo Credit:Pexels

ऑरोरा को हम ध्रुवीय ज्योतिपुंज के नाम से जानते हैं, यह पृथ्वी के आकाश में एक प्राकृतिक घटना है। एक ऐसी घटना जिसे हम रंगीन प्रकाश के रूप में खुली आंखों से देख सकते हैं।

यह मुख्य रूप से High Latitude क्षेत्रों में____Arctic और Antarctica के आसपास देखा जाता है।

उत्तरी ध्रुव में Northern Lights को Aurora Borealis 

कहते हैं।

दक्षिणी ध्रुव में Southern Lights, Aurora Australis के नाम से जाना जाता है।

ऑरोरा एक शानदार गतिशील पर्दे की तरह विविध रंगों में झिलमिलाता है। यह विभिन्न प्रकार का सर्पीला आकार बनाता हुआ  पूरे आकाश को ढक लेता है।

हाल ही में (10th of May 2024 ) LADAKH के आकाश में यह अजूबा दिखाई दिया।

Solar Storm lights___Ladakh/(PTI PHOTO) 

(Indian Astronomical Observatory __HANLE)

Aurora Borealis पहली बार भारत के Ladakh के आकाश में

सरस्वती पर्वत के ऊपर स्थिर रूप में दिखा।

एक इंजीनियर दोरजे अंगचुक ने इस दृश्य को aurora red arc के रूप में वर्णन किया है। 

कहते हैं __"यह लद्दाख के आसमान में एक दुर्लभ घटना है।"

पृथ्वी का Magnetic Field 

हमारी पृथ्वी साढ़े 23° सूर्य की तरफ झुककर घूमती है। इसके घूमने से Magnetic Field पैदा होती है।

Solar Flares जब उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव की ओर पहुंचता

हैं तब चमक पैदा होती है।

सौर ज्वालाएं (Solar Flares) सूरज पर होने वाले भयंकर विस्फोट हैं जो अत्यधिक ऊर्जा के साथ उच्च गति के कणों को अंतरिक्ष में भेजते हैं।

ये ज्वालाएं अक्सर सौर चुम्बकीय तूफानों से जुड़ी रहती है, जिन्हें

(Coronal mass ejection) CME के रूप में जाना जाता है।

Aurora का कोई मौसम नहीं होता है।  सूरज लगातार  बहुत ऊर्जा और छोटे कण (electron-Proton) पृथ्वी की ओर भेजता रहता है।

पृथ्वी का अपना एक परिमंडल है। इसके चारों ओर का सुरक्षात्मक चुम्बकीय क्षेत्र हमें अधिकांश ऊर्जा और कणों से बचाता है।

सूर्य हर समय समान मात्रा में ऊर्जा नहीं भेजता क्योंकि वहां 

सौर हवाएं (Solar Winds) चलते रहते हैं। सौर तूफान के दौरान 

जिसे (coronal mass ejection) भी कहा जाता है। 

सूर्य की सतह से विद्युतीकृत गैस का एक बड़ा गोला फूटता है जो तेज़ उऔगति से अंतरिक्ष में यात्रा करता है।

जब कोई सौर तूफान पृथ्वी की ओर आता है तो कुछ ऊर्जा और छोटे कण उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों पर चुम्बकीय रेखाओं से नीचे पृथ्वी के वायुमंडल से जा टकराता है। इसके फलस्वरूप इन कणों के गैसों के संपर्क में आते ही आकाश में तेज रोशनी का सुंदर प्रदर्शन होता है।

Oxygen से हरी और लाल रोशनी निकलती है।

Nitrogen नीला और बैंगनी रंग बीखेरता है।

अधिक लाल रंग सर्वाधिक ऊँचाई पर दिखाई देता है। हरा रंग उससे

नीचे, और सबसे नीचे की ओर नीला रंग दिखता है।

पराबैगनी विकिरण विशेष उपकरण द्वारा ही दृष्टिगत होती है।

नीला और गुलाबी रंग का ऑरोरा पृथ्वी के भूचुम्बकीय क्षेत्र में नाइट्रोजन के अणुओं की उपस्थिती के कारण होता है।

प्रकृति की यह  जादुई रोशनी  North Sweden के Abisko नाम के एक गांव से सबसे अच्छा दिखती है। इस गांव में स्थित 43 मील लम्बी झील (Tornetrask lake) के कारण वहां की जलवायु अन्य जगहों से एकदम अलग है।
ICELAND में समुद्र तट पर्यटकों को ऑरोरा का अद्भुत दृश्य दिखाता है।
Photo credit:Pexel

Russia/Siberia/Alaska इत्यादि जगहों पर उत्तरी रोशनी का नज़ारा देखा जा सकता है।

विशेष: इस जादुई प्रकाश को देखने के लिए रात का अंधेरा होना जरूरी है। शरद ऋतु और वसंत का मौसम सबसे अच्छा है।

AURORA के बारे में मीथक।

लैटिन में ऑरोरा का मतलब  है भोर।

यह एक रहस्यमय और रोमांटिक नाम है जो रोमन भाषा में भोर की देवी को कहा गया है। यह देवी नित नयेपन और प्रेम का प्रतीक है।

वह हर सुबह नयी नवेली बन कर घोड़ों से सजे रथ पर सूर्य के आगमन का संदेश देती है।


हिन्दू धर्म के अनुसार अरुणिमा या उषा भोर की देवी है जो भूलोक को सूर्य के आगमन की सूचना देती है।

विभिन्न धर्म के साहित्यकारों ने भोर की बेला का बहुत गुणगान किया है। ऑरोरा को ऊर्जा का प्रतीक माना गया है।

अंग्रेज़ कवयित्री Emily Dickinson की एक सुंदर कविता प्रस्तुत है___

'Let me not Mar that Perfect Dream

By an Auroral strain

But so adjust my daily Night

That it will come again'.

Photo:Antarctica/मैत्री स्टेशन 


इस ऑरोरा की सुंदरता वैज्ञानिक को भी अनायास कवि बना देती है।

Antarctica में एक भारतीय अभियान के दौरान भूवैज्ञानिक रविन्द्र कुमार सिंह की पंक्तियां देखिये -

'यह क्या इन्द्रधनुष सा नभ में छाया

नहीं इन्द्रधनुष इतना चपल

नहीं नहीं मेहेंदी रंजित सुकुमार हथेली

नहीं नहीं उनका यह लहराता आँचल'

प्रेरणास्रोत: https://www.livescience.com







Monday, May 13, 2024

CORAL REEF- AN EXOTIC GIFT OF NATURE

 



CORAL REEF _अर्थात् प्रवाल भित्ति  

प्रवाल को आम भाषा में जिसे मूँगा कहते हैं।यह एक चूना प्रधान जीव है।बाहरी रूप से  ये सख्त होते हैं मगर भीतर एक मुलायम जीव पलता है।
मूँगा  जो लाखों -करोड़ों की संख्या में पाए जाते हैं, एक ही जगह पर आपस में सामूहिक रूप से जुड़े रहते हैं। जब एक मूँगा मरता है तो उसी के ऊपर कोई दूसरा प्रवाल विकसित हो जाता है।इसकी टहनियां और शाखाएं निकल आती हैं।
प्रवाल जो आनुवांशिक और समान रूप से बने होते हैं जिसे वैज्ञानिक भाषा में Polyps कहते हैं।
प्रवाल मुख्य रूप से Tropical सागरों में  30°N से 30°S Latitude के बीच पाए जाते हैं। इसका कारण है कि इनको पनपने के लिए 20°से 21°C तापमान उपयुक्त होता है।
प्रवाल को जिन्दा रहने के लिए सूर्य का प्रकाश और Oxygen चाहिए इसीलिए ये कम गहराई में पाए जाते हैं। अधिक गहरा समुद्र इनके लिए उपयुक्त नहीं होता है.
   
PhotoCredit:Pinterest

प्रवाल भित्ति कैसे बनते हैं?
प्रवाल भित्ति अर्थात् मूंगे की चट्टानें__
मूंगा मरने के उपरांत, चूंकि इसकी संख्या सैंकड़ों में होती हैं, एक सख्त चूने की चट्टान में तब्दील हो जाती हैं जो Calcium Carbonet द्वारा बनती जाती हैं।
साधारण भाषा में इसे मूंगे की दिवार अर्थात इसे ही प्रवाल भित्ति Reef कहा जाता है।

प्रवाल भित्ति में कितने रंग दिखते हैं?

वेव रंग अधिकतर बेंगनी, नीले, हरे या लाल रंग में प्रतिबिंबित होते हैं।
कई मूंगे अधिक  चमकीले दिखाई देते हैं। जीवित मूंगे का हरा रंग शैवाल(समुद्री काई) से प्राप्त होता है।

प्रवाल द्वीप किसे कहते हैं?

मूँगा एक तरह से एक ही जगह पनपने वाले जीव होने के कारण इनकी वंशवृद्धि जल्दी-जल्दी होती है। इनका समूह एक ठूंठ की तरह बढ़ता चला जाता है जिनकी शाखाएं भी निकली होती है और ये एक दूसरे पर पटते चले जाते हैं। यह एक द्वीप का आकार ले लेता है। जिसे प्रवाल द्वीप कहा जाता है।

प्रवाल द्वीप कहां-कहां पाए जाते हैं?
Pacific Ocean,Atlantic Ocean,और  Indian Ocean के Eastern Region के महाद्वीपों में प्रवाल भित्ति अधिक पाए जाते हैं।
जैसे__Australia, Indonesia,  Philippines,  Papua, New Guinea,  Fiji, और Maldives Islands.
भारत के सागरों में___
1  Lakshadweep
2. Gulf of Kutch. 
3.  Gulf of Mannar और
4.   Minion Islands.
रामेश्वरम भारत के सबसे बड़ा प्रवाल भित्ति है।
भारत का कुल Coral Reef का क्षेत्र 5,790km square है। Andaman और Nicobar Islands के चार प्रमुख क्षेत्रों तक फैला है।
रामेश्वरम और तूतीकोरिन के बीच 21 Islands हैं।
Nicobar और Andaman Islands530 द्वीपों से युक्त हैं।जो बहुत  अच्छी स्थिति में है।

प्रवाल भित्तियों को जीवित रहने के लिए गर्म,उथला, साफ और उत्तेजित पानी चाहिए।
खोज से पता चला है कि मूंगे की 500Million वर्ष Carabrian Period से हैं जो आज भी जीवित पाए जाते हैं।

विश्व के सबसे बड़े CORAL REEF कहां पाए जाते हैं?

विश्व के सब से विशाल CORAL REEF System जो
The Great Barrier REEF से जाना जाता है, वह Australia महाद्वीप के पूर्वी-तट,Queensland के उत्तर-पूर्वी तट में Marine Park के समानांतर 1200 miles तक फैली हुई  है। इस की चौड़ाई 10 मील से  90 मील तक है।

CORAL REEF प्रकृति की अद्भुत देन है।
इसे समुद्र का वर्षा वन भी कहते हैं
इसे देखने के लिए  पर्टक आते हैं। उस देश की आमदनी में चार चांद लग जाते हैं।

समुद्री चक्रवात और सुनामी कोरल रीफ को बहुत  नुकसान पहुचाते हैं।
Barnacles,Snails और Star fish और ज्वार-भाटा इनको बहुत नुकसान पहुंचाते हैं।

दूसरा सबसे खतरनाक नुकसान मानव द्वारा फैलाया गया प्रदूषण है।
कारखाने का कचरा, प्लास्टिक जो सैकड़ों  टन की मात्रा में समुद में चला जाता है।  अत्यधिक फीशिंग, कोरल खनन,तेल का बहना इससे Polyps नष्ट हो जाते हैं।https://www.britannica.com/science/coral-reef

विशेष : सिर्फ प्रकृति के भरोसे न रहकर हर मानव जाति को प्रवाल संरक्षण के बारे में विचार करने चाहिए।
प्रवाल की कोई सीमा नहीं।
प्रकृति के इस अद्भुत सौंदर्य को हमें अपने आने वाले नस्लों के लिए बचानी चाहिए। 
📸 credit:Pinterest
 










Monday, April 29, 2024

Heron and lotus



बगुला और सरसिज 


उसका नाम सरसिज था
सुन्दर .....कमल के फूल की तरह
मैंने पूछा था___
"तुम समझती हो ?
अपने नाम का मतलब!!"

"मुझे क्या लेना-देना
नाम की परिभाषा से"

फिर एक दिन मैंने पूछा___
"तुम इन बगुलों में क्या देखती हो?"
"अपना गुरू है।"

वह बहुत गम्भीर थी।
मैं मुस्करा के चल दी।

जीवन के रास्ते ने कई मोड़ लिये
मैं भी एक रास्ते चल दी___!
उसे भी साथ चलने को कहा।
बड़ा साफ़ जवाब था उसका
"मैं अपने मंजिल पर हूँ।"

मुझे उसके जवाब ____
रास्ते भर परेशान करते रहे
लेकिन मुझे अपनी मंजिल तलाशनी थी।

सालों के भटकन के बाद
मैं फिर उसी जगह पर आयी
शांत सरोवर
दीर्घ पत्तों के बगल में कई सरसिज खिले थे।
और बगुले खडे थे मौनावस्था में_____!!
स्वच्छ जल में मछलियाँ तैर रही थी
तभी मैंने छपाक् की एक आवाज़ सुनी
बगुले की चोंच में एक बड़ी मछली___
छटपटा रही थी।

मैंने तालाब पर दृष्टि डाली
जल में हलचल था।

सरसिज मुस्करा रही थी
उसकी मुस्कराहट में___
'ज्ञान, दर्शन, राजनीति__
मुक्ति निर्वाण सब कुछ समाहित था।'

___कुंती।




Monday, April 15, 2024

POEM___Who?

 Who "कौन...?


मेरे पीछे...!!

मैं हर सुबह-शाम तेरी तलाश में आती हूँ..!!

हवा जाने क्या गुनगुनाता है..?

कुछ शब्दों के मकड़जाल में उलझ जाती हूँ..!

कितना सोचती हूँ..!

सोच-सोच कर दिमाग खाली हो जाता है।

एक शून्य बाहर और भीतर घिर आता है.!

एक अधूरापन..

मन को सालता है..!

मैं निकल आती हूँ उस क्षितिज की खोज में..!

कि शायद...

तुम मुझे मिल जाओ..!!"




Tuesday, April 9, 2024

Time

 "With the clock tickling...


The bird of time kept flying...
I used to be so proud of having time tied on my wrist... then
...?
At that time I did not know the importance of time..!
It seemed as if everything was within my control...

The waves of the ocean explained many things to me,many times.
Did I understand?
This thirst like a well..?
The ocean surging in the eyes without any reason..!
Whose footsteps would I listen to in the ocean?
Who knows in whose thoughts the evening is falling..?
The humming sunlight of the morning...
would often touch me and indicate your presence somewhere...

With  the clock ⏰  tickling
 !

I would sometimes unknowingly write a name...
on the sand... then!
The waves burn with jealousy..!!
I did know ..?
The indelible game of fate...
Has the creator's mathematics been manipulated?
No... I counted...
everything was fine..!

Time became tangible again..
saying this..?
That...
you don't mourn me...
whatever happens, let it happen... I was yours
even then...
I am today...
and I will be there tomorrow too..!!"



Eclipse,EarthDay

FOCUS, LEARN AND GROW

 The Trilogy of Transformation: Focus, Learn, and Grow We live in a world that constantly demands our attention, yet rarely offers us direct...