'उसका ख्याल..!
सुनहरे चादर में लिपटी...!
उलझा था मेरे काले केशों में...!
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| उसका ख्याल |
.
गोधूली बेला..!..और...!!
जल रहा था..!
आकाश में सूरज...!
.
सांझ और रात के बीच..!
हो रहा था एक मौन संवाद..!
.
मैं शृंगार करूँ-
कि-
न करूँ...?
ओ मेरे भ्रमित मन..!
.
क्यों...?
हरसिंगार की उदास खूशबू...?
मेरी आत्मा को कचोटती है...?
बारम्बार...!!
कुन्ती।

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