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Thursday, April 15, 2021

Dreams - सपने



DREAMS- सपने




DREAMS- सपने



 ''कुछ सपने रह जाते हैं...!

तैरते..!
हकीकत की दरिया  में...!
कुछ मीन सी मचलती आशाएँ..!
तरसती रहती...
स्वच्छ झील में...
मौन !!!!!
                           DREAMS-सपने



लुभावने...!
सारस के जोड़े
अमर प्रेम के वशीभूत। 

                             DREAMS-सपने




चुपके से बहती है ..
मंद हवाएँ...
सर्द रातों में..!
ठिठुरते जिस्म..
अपने ही ख्यालों की गरमाहट

                         
                           DREAMS-सपने




रह जाते हैं सिमटे..??
और...!
कुछ सपने ऐसे भी...
जो..जीवन के आपाधापी में
रह जाते हैं..
उलझे..??


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