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Friday, April 2, 2021

Destination

चलते-चलते मैं मैं धरती के किस छोर पर आ गया_____
ये मेरी मंजिल तो नहीं____?
___एक सीप

कौन मेरा आकाश ?
ये सागर की हलचल____
कहीं मुझे लील न ले ??
___एक पर

उफ् ये साँसें !!
मुक्ति की साँसें !!!
___धुआँ

अपनों से मिलने की खुशी___
हाँ, मैं पानी हूँ
वाष्प बनना बडा कष्टदायक है.
___पानी.

उडने की खुशी
कोई मुझसे पूछे !
___पाखी

एक शाम तुम्हारे नाम
___मेरे सनम

मुझे रोज तुम्हारा इंतजार रहता है.
___घर

___नीतू.#amitbharart

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