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Thursday, March 11, 2021

एक सवाल






 

कब मैंने तुमसे वादा किया था। 
मैंने कब बाँधा था तुम्हें बंधन में, 

जो भी किया था, तुमने ही किया हर सुबह आलस्य तजकर हमने पंजा की थाल सजाई और अरूणोदय होते तुम्हारा दर्शन किया। मिथ्या लगी थी जग की सारी बातें जब हमने तुमसे प्रेम किया । 

 अब क्रोध करूँ या मान करूँ या करूँ अपनेआप पर दया___ रीति रिवाजों के नाम पर खींच दी तुमने सिंदूर की लम्बी रेखा भाग्य ने लिख लिया माथे पर मृत्युदंड चेरहे पर घूँघट खींचकर _____ मौत का कहीं नामोनिशान नहीं _____
फिर भी खामोश है तकदीर .
एक अदृश्य भय मन को है सालता रहता है ।
मेरे हाथ में चाय का कप है।
चाय से उठता धुंआ जिंदगी की नश्वरता बयां कर रही है।


Photo Credit : Pinterest 

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