सर्द मौसम का अंतिम चरण
नीला स्वच्छ आकाश
कुछ मिठास तेरे बातों की
साजन! बांध ली तेरे शब्दों की पंखुड़ी
मैंने अपनी पलकों में।
ढलती शाम की तन्हाई
झर् झर् मर् मर् गिरे पत्ते हौले हौले
मेह भी बरसे रेशम के तार सी
जिसे लोक ली मैंने
अपने जूड़े की जाल में।
वह कौन जादूगर
अंधेरी रात में विलोप हुआ विद्युत सा
न बादल बरसा
न बिजली कड़की
सागर लरजता रहा रात भर
पटाक्षेप हुआ जब निशा के अंतिम पहर का
मैं खोयी थी सपनों के कोलाहल में।
#नीतू
Photo:CourtesyofPrinterest

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