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Sunday, March 3, 2024

Invisible net-अदृश्य जाल

               


             

                  Invisible net-अदृश्य जाल 




Invisible net- एक अदृश्य जाल

जब भी प्रकट होता है

हमारे आस-पास 

 एक अजस्र प्रकाश बन कर छा जाता है।

हमारे वजूद पद।


Invisible Net- अदृश्य जाल


Invisible net-अदृश्य जाल 

इसकी कोई परछाई नहीं होती

वह कभी भी, कहीं भी

धरती की धड़कन की तरह

हरित बनकर धरती पर छा जाती है।


Invisible  net- अदृश्य जाल 

सुबह की ठंडक में

या दोपहर की धूप में

शाम की तन्हाई में 

या रात की खामोशी में

जब भी चाहे गाती है।

युगों से, हर उम्र के इंसान के चेतन में 

सोता जागता

 तय करता है।

एक अंजान सफर।

                             Invisible net-अदृश्य जाल 



Invisible net- अदृश्य जाल 

एक पहेली की तरह

कवि -ज्ञानी जिसे बुझते रहते हैं

कौन है? क्या है? 

(प्रेम ही तो है-एक अदृश्य जाल की तरह)











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