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Friday, March 8, 2024

Long Night

                            Long Night लम्बी रात






 बड़ी लम्बी रात है

आज तो सो लूँ

न जाने कितना लम्बा होगा कल का सफर

बड़ी लम्बी है रात है
उमड़ रही है नदियाँ
अब नींद कहाँ अँखियों में
है घना अंधेरा और तूफानी हवा का शोर

बादलों का घर्षण__और
बिजली की तड़प
काँप रहा है मन
अब तो सो लूँ , कुछ पल में होना है भोर।

न दिख रही क्षितिज 
बादलों का घनापन
कौन दिशा इंगित कर रहा
है कितनी लम्बी रात, और तूफानों का होर

पथिक! खिड़की का पट  खोल
अपने रंघ्रों में भर  ले प्राण वायु
कर नयी दिशा की खोज
देख! प्राची में खुल रहा है नव युग का द्वार।

Thursday, March 7, 2024

नारी सशक्तिकरण _एक रहस्य

 




आखिर क्यों नारी सशक्तिकरण एक रहस्य बन कर सामने आया?
__अगर हम पुराणों, उपनिषदों को पलट कर देखें तो नारी को एक शक्ति के रूप में पाया गया है।
__कहते हैं कि ब्रम्हा ने जब आदमी को बनाया, तो आदमी अकेले रहते रहते उदास रहने लगा।जिस उद्देश्य के लिए  उसे बनाया गया था, ब्रम्हा ने देखा उसे कोई उर्जा नहीं मिल रही है अत: आदमी की पसली से एक हड्डी निकाल कर एक औरत बनाया। औरत को पाकर आदमी उर्जावान हो गया।
__अगर पुराणों की बात करें तो शिव को अर्धनारीश्वर कहा गया है। शिव-शक्ति। शिव शक्ति के बिना शव के समान है।इसी प्रकार __
__विष्णु लक्ष्मी के बिना अधूरा है। वे अपनी योगमाया के द्वारा ही संसार का पालन करते हैं। (मिथक)
कालांतर में जैसे जैसे युग बदलता गया। इंसान की सभ्यता बदलती गयी। इंसान बंजारे की तरह पृथ्वी के इस छोर से दूसरे छोर तक विचरण करने लगा।
धीरे-धीरे इंसान का मन बदलने लगा। ब्रम्हा ने जिस औरत को आदमी की ऊर्जा के लिए उसे प्रदान किया था उसने उसपर अपना आधिपत्य जमाने लगा।
___इंसान जब सभ्य बना तो उसने अपने अस्तित्व का विस्तार करने लगा। अपने जमीन का क्षेत्रफल बढ़ाया।
उसे एक घर की आवश्यकता हुई। जब घर बनाया उस घर की शोभा बढ़ाने के लिए उसे औरत की जरूरत हुई।
___अब इसी संदर्भ से आदमी के मन में औरत को अपनी निजी सम्पत्ति के रूप में प्राप्त करने का ख्याल आया। चूंकि औरत आदमी की तरह ही स्वतंत्र थी अतः आदमी को औरत की स्वतंत्रता अच्छी नहीं लगी। उसने तरह तरह के बंधन औरत के लिए बनाए।

___औरत ने भी उस बंधन को सहर्ष स्वीकार कर लिया।

समय बदला , युग बदला। जैसे जैसे सभ्यता आगे बढ़ी इंसान ने अपने जमीन का दायरा बढ़ाकर युद्ध लड़ा। जो युद्ध  में जीता जमीन के साथ ही औरत भी जीत लिया। इसका जीता जागता उदाहरण महाभारतकालीन सभ्यता से है।
इसका विकृत रूप तब और भयावह रूप लिया जब मुगलकालीन सभ्यता आयी। औरत के अस्तित्व का कोई मोल न रहा।
__औरत का मानसिक हनन होती रही। एक समय ऐसा आया जब और अपने भाग्य से समझौता कर ली।
ऐसा नहीं कि औरत की दुर्दशा सिर्फ एक समाज की देन थी। अगर इतिहास को खंगाला जाए तो नारी दुर्दशा की अनेक ज्वलंत उदाहरण मिल जाएगी।
समय बदलता गया। आविष्कार पर आविष्कार होता गया।
___औरत अपने कछुए के खोल से धीरे-धीरे बाहर आने लगी।वह अपने को समाज में एक विशिष्ट रूप में देखने लगी।
___नारी संघर्ष तब और विकराल रूप  धारण किया जब वेब की दुनिया में क्रांति आया।
नारी सशक्तिकरण को लेकर बहुत सारे कानून बने।
जैसे__जैसे आर्थिक,  सामाजिक,  सांस्कृतिक, और राजनैतिक।
___औरत अब उस रहस्य को पहचान गयी है जिस कारण उसकी उत्पत्ति हुई  थी।
___अब वह हर विधा में समर्थ  है।






Wednesday, March 6, 2024

Mawsam मौसम

 सर्द मौसम का अंतिम चरण

नीला स्वच्छ आकाश 

कुछ मिठास तेरे बातों की

साजन! बांध ली तेरे शब्दों की पंखुड़ी

                                      मैंने अपनी पलकों में।

ढलती शाम की तन्हाई 

झर् झर् मर् मर् गिरे पत्ते हौले हौले

मेह भी बरसे रेशम के तार सी

जिसे लोक ली मैंने

                                 अपने जूड़े की जाल में।

वह कौन जादूगर 

अंधेरी रात में विलोप हुआ विद्युत सा

न बादल बरसा

न बिजली कड़की

सागर लरजता रहा रात भर

पटाक्षेप हुआ जब निशा के अंतिम पहर का

                               मैं खोयी थी सपनों के कोलाहल में।

#नीतू

      


Photo:CourtesyofPrinterest

Sunday, March 3, 2024

Invisible net-अदृश्य जाल

               


             

                  Invisible net-अदृश्य जाल 




Invisible net- एक अदृश्य जाल

जब भी प्रकट होता है

हमारे आस-पास 

 एक अजस्र प्रकाश बन कर छा जाता है।

हमारे वजूद पद।


Invisible Net- अदृश्य जाल


Invisible net-अदृश्य जाल 

इसकी कोई परछाई नहीं होती

वह कभी भी, कहीं भी

धरती की धड़कन की तरह

हरित बनकर धरती पर छा जाती है।


Invisible  net- अदृश्य जाल 

सुबह की ठंडक में

या दोपहर की धूप में

शाम की तन्हाई में 

या रात की खामोशी में

जब भी चाहे गाती है।

युगों से, हर उम्र के इंसान के चेतन में 

सोता जागता

 तय करता है।

एक अंजान सफर।

                             Invisible net-अदृश्य जाल 



Invisible net- अदृश्य जाल 

एक पहेली की तरह

कवि -ज्ञानी जिसे बुझते रहते हैं

कौन है? क्या है? 

(प्रेम ही तो है-एक अदृश्य जाल की तरह)











Sunday, February 25, 2024

Love



 हव्वा के प्यार में....!

माना..!
आदम ने शैतान का सेब खाया...!
क्या दोषी था आदम...?
या हुआ था उसके विश्वास का हनन...!
.
शैतान का मकसद क्या था...?
हव्वा को पाना....?
इस प्रश्न को लेकर .....!
उलझा है सारा संसार...!
.
आदम और हव्वा...!
चुका रहे हैं आज भी...!
शैतानी सेब की कीमत...!
और...!
शैतान ढूँढ़ रहा है...!
दूसरे ग्रहों पर....!
एक और हव्वा...!!


 










Thursday, February 22, 2024

Jealousy जलन क्या होती है?

Jealousy जलन क्या चीज़  होती है?

आपको नहीं  पता क्योंकि आप खुशमिज़ाज इंसान  है। आप खुद  भी खुश रहते हैं  और हर किसी  को  खुश  देखना चाहते हैं।

आप जीवन में  बहुत कुछ  करना  चाहते  हैं  और करते  भी हैं  लेकिन  आपको  पता भी हैं  कुछ लोग  आपकी अच्छाइयों  से जलते भी हैं?

आपको  कितना नुकसान  पहुँचाया जाता  है लेकिन  आपको  पता भी नहीं  चलता अगर एहसास  भी होता है  तो आप ईश्वर  की मर्जी समझते हैं।

 

Wednesday, February 14, 2024

आइना Aina

 






My mirror .....! 
It shows more of my soul than
my face . 
Every person is a worshipper of beauty…! Whereas- 
my mirror ....! Like a pale Mayanka- in the dawn light...! Shows me my axis…! 
One of my steps collides with the wall…! 
While- the other step…! 
Stops on a transparent wall…!! 
Who would I fight with…! 
What would happen to my existence…?
I am worried….! To such an extent….! 
And I ask everyone…! 
Why doesn't my mirrorbreak…? 
#coonteething 



























Valentine

 '‘प्रेम के कुछ बंधन ऐसे भी होते हैं....!

जिससे-

हम प्रेमसूत्र में तो बंधते हैं.....!

यह जाने बगैर कि-

कि हम चाहते क्या है...?

हमरे मन में एक अंधे कुएँ सी-

प्यास जागती है...!!


कितने रिश्ते पनपते हैं उस प्रेम से....

हमारे आस पास....!

हम बांध नहीं पाते हैं जिन्हें...!

वक्त से शिकायत रहती है अक्सर...!

यह जाने बिना कि-

वक्त हमें कितना कुछ दे जाता है...!


बेवफ़ा हम नहीं तो कौन है...?

और...

कितने संवाद करते हैं हम-

अपने मन के खोखले होते खण्डहर से...!


जितना भी हम जियें...!

लम्बी उमर लेकर नहीं..!

खुशानुमा जिंदगी  जीकर...!!



Photo:Pinterest


Kali Raat





वह काली अंधेरी रात

कैसे भूल पाऊंगी वह काली अंधेरी रात
एक झटके में___ मानो
जैसे मैं काली ग्ह्वर में समाती चली गयी ।

मैं चीख चीख के कह रही थी __
"मैं अभी जिंदा हूं।
मुझपर रहम करो
मुझे इस ब्लैक होल से बाहर निकालो।
लेकिन किसीने मेरी एक न सुनी।
सब अपना अपना राग अलापते रहे।
सब को अपने मशहूर होने की फ़िक्र थी।

हर कोई बढ़ चढ़ कर अपना प्यार मुझ पर जताता रहा।
लोगों का शोर बढ़ता गया,बढ़ता गया
अंततः, उस शोर में मेरी आवाज़ क्षीण होती गयी।
मुझे मृत घोषित कर दिया गया।
श्वेत फूलों से मुझे ढक दिया गया।
ऐसे कि ___
मेर लहूलुहान जिस्म  न दिखे।
आह! ___
मेरी विदाई शोक गान से सबकी आंखें भर आती।


मैं भी रो पड़ी अपनी बेबसी पर
मैं तो जिंदा रहना चाहती थी
अपनों के बीच
अपने बच्चों के बीच
आजीवन प्यार लुटाती हुई।
हवा में फैली खुशबू की तरह।

Thursday, January 18, 2024

शबरी के राम


 

शबरी कौन थी?
आज के संदर्भ में सब जानना हैं कि आखिर शबरी कौन थी और वह राम के लिए  इतना महत्वपूर्ण क्यों थी?

वास्तव में शबरी को सबर का पर्याय कहा जाए  तो अतिशयोक्ति न होगी।
जिंदगी भर अनदेखे  किसी के नाम का जाप करना और उसकी प्रतिक्षा करना श्रद्धा और और प्रेम की पराकाष्ठा ही तो है।
शबरी भीलनी होते हुए दयालु थी। वह भीलों के सरदार की बेटी थी।उसका असली नाम श्रमणा थी।
कहते हैं कि वह अपने पूर्व जन्म में शापित थी और उस शाप से राम ही उसको मुक्ति दिला सकते थे
वह मातंग ॠषि की बहुत सेवा की थी। मातंग ऋषि दिवंगत होने से पहले शबरी को अपने आश्रम में रहने की अनुमति दे दी थी और कहा था ___
" शबरी तुम यही कुटिया में रहना। इसी मार्ग से राम लक्षमण गुजरेंगे। तुम उनका स् स्वागत करना।  तुम्हारा कल्याण होगा। तभी से शबरी राम की राह निहारती है।
कभी रास्तों को फूलों से सजाती है तो कभी बेर चक चक कर राम के ल रखती है। 

Sunday, November 5, 2023

Ghost

हव्वा के प्यार में....!
माना..!
आदम ने शैतान का सेब खाया...!
क्या दोषी था आदम...?
या हुआ था उसके विश्वास का हनन...!
.
शैतान का मकसद क्या था...?
हव्वा को पाना....?
इस प्रश्न को लेकर .....!
उलझा है सारा संसार...!
.
आदम और हव्वा...!
चुका रहे हैं आज भी...!
शैतानी सेब की कीमत...!
और...!
शैतान ढूँढ़ रहा है...!
दूसरे ग्रहों पर....!
एक और हव्वा...!!

Eclipse,EarthDay

FOCUS, LEARN AND GROW

 The Trilogy of Transformation: Focus, Learn, and Grow We live in a world that constantly demands our attention, yet rarely offers us direct...