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Wednesday, February 14, 2024

Valentine

 '‘प्रेम के कुछ बंधन ऐसे भी होते हैं....!

जिससे-

हम प्रेमसूत्र में तो बंधते हैं.....!

यह जाने बगैर कि-

कि हम चाहते क्या है...?

हमरे मन में एक अंधे कुएँ सी-

प्यास जागती है...!!


कितने रिश्ते पनपते हैं उस प्रेम से....

हमारे आस पास....!

हम बांध नहीं पाते हैं जिन्हें...!

वक्त से शिकायत रहती है अक्सर...!

यह जाने बिना कि-

वक्त हमें कितना कुछ दे जाता है...!


बेवफ़ा हम नहीं तो कौन है...?

और...

कितने संवाद करते हैं हम-

अपने मन के खोखले होते खण्डहर से...!


जितना भी हम जियें...!

लम्बी उमर लेकर नहीं..!

खुशानुमा जिंदगी  जीकर...!!



Photo:Pinterest


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