जब चाँद खिड़की के पार दिखता है..!
और....कोई मुसाफिर...!!
बादल पर घुड़सवारी करता है ..!
मंद मंद मुस्काता है चाँद...!!
कोई अक्स जब बादल पर उभरता है...!
हौले..! हौले..!! तब,
दिल की धडकनें तेज हुई जाती है..!
ओस कण हीरे की कणी सा चमकता है. .!
एक नम ..
मधुर सा एहसास मन में उपजता है. .!
लेकिन किसके लिये..!
किशोरी मन ...
जान नहीं पाती है..!!



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