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Wednesday, March 6, 2024

Mawsam मौसम

 सर्द मौसम का अंतिम चरण

नीला स्वच्छ आकाश 

कुछ मिठास तेरे बातों की

साजन! बांध ली तेरे शब्दों की पंखुड़ी

                                      मैंने अपनी पलकों में।

ढलती शाम की तन्हाई 

झर् झर् मर् मर् गिरे पत्ते हौले हौले

मेह भी बरसे रेशम के तार सी

जिसे लोक ली मैंने

                                 अपने जूड़े की जाल में।

वह कौन जादूगर 

अंधेरी रात में विलोप हुआ विद्युत सा

न बादल बरसा

न बिजली कड़की

सागर लरजता रहा रात भर

पटाक्षेप हुआ जब निशा के अंतिम पहर का

                               मैं खोयी थी सपनों के कोलाहल में।

#नीतू

      


Photo:CourtesyofPrinterest

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