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Friday, March 8, 2024

Long Night

                            Long Night लम्बी रात






 बड़ी लम्बी रात है

आज तो सो लूँ

न जाने कितना लम्बा होगा कल का सफर।

बड़ी लम्बी है रात है
उमड़ रही है नदियाँ
अब नींद कहाँ अँखियों में
है घना अंधेरा और तूफानी हवा का शोर

बादलों का घर्षण__और
बिजली की तड़प
काँप रहा है मन
अब तो सो लूँ , कुछ पल में होना है भोर।

न दिख रही क्षितिज 
बादलों का घनापन
कौन दिशा इंगित कर रहा
है कितनी लम्बी रात, और तूफानों का होर।

पथिक! खिड़की का पट  खोल
अपने रंघ्रों में भर  ले प्राण वायु
कर नयी दिशा की खोज
देख! प्राची में खुल रहा है नव युग का द्वार।

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