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Tuesday, March 16, 2021

रास्ते झिलमिलाते हुए

जीवन  में  कुछ  रास्ते  बहुत  लम्बे  होते  हैं। कुछ  रास्ते  आंकड़ों से  अपने पड़े होते हैं। 
कुछ  राहें छोटी होती है  मगर फूलों  का एहसास  देती है।
हालांकि  जिंदगी  फूलों  की  सेज  नहीं। 

ऐ मुसाफिर!
वसंत  के पहले दिन  से  मेरा जो सफ़र शुरू हुआ  था __
बैसाखी  के  आने  से  पहले  ही खत्म  हो गया। 
रह गया है दोपहर में  तपती लू और दोपहर का सन्नाटा। 

नज़रों  से दूर झिलमिलाता  है एक क्षितिज 
यादों  का जीना परदा जो मंज़िल  का एहसास  तो  देता है  पर________
वह कदापि  मंज़िल  नहीं  होती।

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